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बार-बार पेशाब आना हो सकता है किडनी स्टोन का संकेत! पुरुष भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानें डॉक्टर की चेतावनी

 


बार-बार पेशाब आना एक ऐसी समस्या है जिसे अधिकांश लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोगों को लगता है कि ज्यादा पानी पीने, ठंड के मौसम या चाय-कॉफी अधिक पीने के कारण ऐसा हो रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समस्या लगातार बनी रहे या इसके साथ पेशाब में जलन, खून आना, कमर में दर्द, पेट में तेज दर्द या बदबूदार पेशाब जैसी शिकायतें भी हों, तो यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

विशेष रूप से पुरुषों में बार-बार पेशाब आने की समस्या कई बार किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी), यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), प्रोस्टेट की बीमारी, डायबिटीज या कुछ मामलों में कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। इसलिए समय रहते जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी है।

शारदाकेयर हेल्थसिटी की वरिष्ठ सलाहकार एवं यूरोलॉजिस्ट डॉ. शिल्पी तिवारी के अनुसार, यदि बार-बार पेशाब आने के साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। शुरुआती जांच से बीमारी का पता लगाकर गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

क्यों बार-बार पेशाब आना बन सकता है चिंता का कारण?

सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति दिनभर में कई बार पेशाब करता है और यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन यदि बिना ज्यादा पानी पिए भी बार-बार पेशाब की इच्छा हो रही हो या रात में कई बार उठना पड़ रहा हो, तो यह शरीर में किसी समस्या का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार किडनी में बनने वाली छोटी पथरी धीरे-धीरे मूत्र नली की ओर बढ़ती है। इस दौरान मूत्र मार्ग में रुकावट या जलन होने लगती है, जिससे बार-बार पेशाब आने की इच्छा महसूस होती है।

यदि समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो दर्द बढ़ सकता है और संक्रमण का खतरा भी पैदा हो सकता है।

पुरुषों में किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण

यूरोलॉजिस्ट के अनुसार पुरुषों में किडनी स्टोन के दौरान निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना।

  • पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना।

  • कमर या पेट के एक तरफ तेज या हल्का दर्द होना।

  • पेशाब में खून दिखाई देना।

  • पेशाब का रंग गहरा होना या उसमें दुर्गंध आना।

  • मतली या उल्टी होना।

  • पेशाब का रुक-रुककर आना।

  • पेशाब करते समय अत्यधिक असहजता महसूस होना।

इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

पुरुष क्यों करते हैं लक्षणों को नजरअंदाज?

डॉक्टरों का कहना है कि पुरुषों में एक आम प्रवृत्ति होती है कि वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लंबे समय तक टालते रहते हैं।

कई लोग काम की व्यस्तता, समय की कमी या यह सोचकर डॉक्टर के पास नहीं जाते कि दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा। कुछ मरीज शुरुआती दर्द को गैस, मांसपेशियों में खिंचाव या थकान समझ लेते हैं।

लेकिन जैसे-जैसे किडनी स्टोन बड़ा होता है या मूत्र नली में फंसता है, दर्द असहनीय हो सकता है। कई बार मरीज को आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत पड़ जाती है।

किन लोगों में ज्यादा रहता है किडनी स्टोन का खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में किडनी स्टोन बनने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होती है।

इनमें शामिल हैं—

  • जो लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते।

  • अधिक नमक खाने वाले लोग।

  • अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड खाने वाले।

  • रेड मीट और नॉनवेज का अत्यधिक सेवन करने वाले।

  • शराब का अधिक सेवन करने वाले।

  • मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति।

  • जिनके परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन हो चुका हो।

  • लंबे समय तक गर्म वातावरण में काम करने वाले लोग।

  • अत्यधिक पसीना आने के बावजूद पर्याप्त पानी न पीने वाले।

गर्मियों और उमस वाले मौसम में शरीर से अधिक पानी निकलने के कारण डिहाइड्रेशन बढ़ जाता है, जिससे पेशाब गाढ़ा हो जाता है और पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है।

बार-बार पेशाब आना किन अन्य बीमारियों का संकेत हो सकता है?

बार-बार पेशाब आने का मतलब हमेशा किडनी स्टोन नहीं होता।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे—

  • यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

  • प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना

  • अनियंत्रित डायबिटीज

  • ओवरएक्टिव ब्लैडर

  • मूत्राशय की पथरी

  • कुछ दवाओं का प्रभाव

  • दुर्लभ मामलों में मूत्राशय या किडनी से संबंधित कैंसर

इसी वजह से बिना जांच के स्वयं बीमारी का अनुमान लगाना उचित नहीं माना जाता।

किडनी स्टोन का पता कैसे चलता है?

यदि मरीज बार-बार पेशाब आने, कमर दर्द या पेशाब में खून जैसी शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचता है तो सबसे पहले उसकी मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है।

इसके बाद आवश्यकता अनुसार निम्न जांच कराई जा सकती हैं—

  • अल्ट्रासाउंड

  • यूरिन टेस्ट

  • ब्लड टेस्ट

  • एक्स-रे

  • सीटी स्कैन (जरूरत पड़ने पर)

इन जांचों से स्टोन का आकार, स्थान और उसकी गंभीरता का पता लगाया जाता है।

किडनी स्टोन का इलाज कैसे किया जाता है?

इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि स्टोन कितना बड़ा है और मरीज की स्थिति कैसी है।

शुरुआती अवस्था में

यदि पथरी छोटी हो तो डॉक्टर सामान्यतः—

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह देते हैं।

  • दर्द कम करने की दवा देते हैं।

  • ऐसी दवाएं देते हैं जो स्टोन को प्राकृतिक रूप से बाहर निकलने में मदद करती हैं।

बड़े स्टोन होने पर

यदि स्टोन बड़ा हो या मूत्र मार्ग में फंस गया हो तो आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है।

इनमें शामिल हैं—

  • एंडोस्कोपिक सर्जरी

  • लेजर तकनीक

  • अन्य न्यूनतम चीरा वाली प्रक्रियाएं

इन आधुनिक उपचारों से अधिकांश मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं।

बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली में कुछ बदलाव करके किडनी स्टोन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसके लिए—

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

  • जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन न करें।

  • जंक और प्रोसेस्ड फूड सीमित मात्रा में खाएं।

  • रेड मीट और अधिक प्रोटीन वाले भोजन का संतुलित सेवन करें।

  • पेशाब को लंबे समय तक न रोकें।

  • नियमित व्यायाम करें।

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें।

  • यदि पहले किडनी स्टोन हो चुका है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराते रहें।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार निम्न स्थितियों को मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए—

  • कमर या पेट में असहनीय दर्द होना।

  • पेशाब में खून दिखाई देना।

  • तेज बुखार के साथ पेशाब में जलन होना।

  • लगातार उल्टी होना।

  • पेशाब बिल्कुल बंद हो जाना।

  • दर्द के साथ बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होना।

ऐसी स्थिति में देरी करना किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

समय पर जांच ही है सबसे बड़ा बचाव

डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या को केवल सामान्य आदत या मौसम का असर मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। यदि यह परेशानी लगातार बनी रहती है या इसके साथ दर्द, जलन, खून या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

समय पर जांच से किडनी स्टोन सहित कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। इससे इलाज आसान हो जाता है और किडनी को स्थायी नुकसान से भी बचाया जा सकता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी लक्षण, बीमारी या उपचार के लिए स्वयं दवा न लें। सही सलाह और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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